×

Health Quiz in Hindi: किस बर्तन में पानी पीने से गुस्सा कम आता है? जानिए विभिन्न बर्तनों के स्वास्थ्य लाभ

प्राचीन काल से ही विभिन्न धातुओं के बर्तनों में पानी पीने की परंपरा रही है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि जिस बर्तन में हम पानी पीते हैं, वह हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। क्या आप जानते हैं कि कौन सा बर्तन गुस्से को कम करने में मदद करता है और क्यों? आइए जानते हैं विभिन्न धातुओं के बर्तनों के स्वास्थ्य लाभों के बारे में।

1. लोहे के बर्तन और स्वास्थ्य

लोहे के बर्तन में पानी या भोजन रखने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है। यह विशेष रूप से एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद है। लोहे में पानी रखकर पीने से खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है। लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने से भोजन में प्राकृतिक रूप से आयरन मिल जाता है। हालांकि, अत्यधिक आयरन भी हानिकारक हो सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है। लोहे के बर्तन जंग लगने पर खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए उचित देखभाल जरूरी है।

2. तांबे के बर्तन के आयुर्वेदिक लाभ

तांबे के बर्तन में पानी पीना आयुर्वेद में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। तांबे में एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं जो पानी को शुद्ध करते हैं। तांबे का पानी पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है। यह त्वचा के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि तांबा मेलेनिन उत्पादन में मदद करता है। तांबे में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को दूर करते हैं। तांबे का पानी थायरॉयड ग्रंथि को नियमित करने में भी मदद करता है।

वैज्ञानिक शोध: अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, तांबा एक आवश्यक खनिज है जो एंजाइम निर्माण और हड्डियों की मजबूती में योगदान देता है।

3. स्टील के बर्तन की सुरक्षा

स्टेनलेस स्टील के बर्तन आजकल सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं। ये टिकाऊ, जंग-मुक्त और साफ करने में आसान होते हैं। स्टील के बर्तन किसी भी प्रकार का हानिकारक रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करते। ये गर्म और ठंडे दोनों तरह के पेय के लिए सुरक्षित हैं। स्टील में क्रोमियम और निकल होता है जो इसे जंग से बचाता है। हालांकि, स्टील के बर्तन में पानी रखने से कोई विशेष स्वास्थ्य लाभ नहीं मिलता। ये मुख्य रूप से सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प हैं।

4. पीतल के बर्तन की परंपरा

पीतल तांबे और जस्ते (zinc) का मिश्रण है। भारतीय परंपरा में पीतल के बर्तनों का बहुत महत्व रहा है। पीतल के बर्तन में पानी रखने से पानी में तांबे और जस्ते के गुण आ जाते हैं। जस्ता प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है और घाव भरने में मदद करता है। पीतल के बर्तन पानी के pH स्तर को संतुलित करते हैं। हालांकि, पीतल के बर्तन को नियमित सफाई की जरूरत होती है क्योंकि इस पर पतली हरी परत (patina) जम सकती है।

5. किस बर्तन में पानी पीने से गुस्सा कम आता है – सही उत्तर

सही उत्तर है: तांबा। आयुर्वेद और आधुनिक शोधों के अनुसार, तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से मानसिक शांति मिलती है और गुस्सा कम होता है।

वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक आधार:

आयुर्वेद में तांबे को “त्रिदोष” (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने वाला माना गया है। विशेष रूप से पित्त दोष को कम करता है, जो गुस्से और आक्रामकता का मुख्य कारण होता है।

वैज्ञानिक व्याख्या:

  1. मस्तिष्क कार्य में सुधार: तांबा न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संचार को बेहतर बनाता है।
  2. तनाव हार्मोन में कमी: तांबा कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  3. थायरॉयड नियमन: तांबा थायरॉयड ग्रंथि को संतुलित करता है, जिसका सीधा प्रभाव मूड और भावनाओं पर पड़ता है।
  4. शीतलन प्रभाव: आयुर्वेद के अनुसार, तांबे का प्राकृतिक शीतलन प्रभाव होता है जो शरीर और मन की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है।

उपयोग की विधि:

  • रात में तांबे के बर्तन में पानी भरकर रखें
  • सुबह खाली पेट यह पानी पिएं
  • कम से कम 6-8 घंटे तांबे के बर्तन में पानी रखें
  • प्रतिदिन 2-3 गिलास तांबे का पानी पर्याप्त है

संदर्भ:

  • Journal of Health Science (2012) में प्रकाशित शोध में तांबे के एंटीमाइक्रोबियल गुणों की पुष्टि
  • आयुर्वेदिक ग्रंथ “चरक संहिता” में तांबे के औषधीय गुणों का विस्तृत वर्णन
  • Environmental Protection Agency (EPA) ने तांबे को प्राकृतिक एंटीमाइक्रोबियल पदार्थ के रूप में मान्यता दी है

6. चांदी के बर्तन के लाभ

चांदी के बर्तन भी प्राचीन काल से उपयोग किए जाते रहे हैं। चांदी में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। चांदी के बर्तन में रखा पानी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। चांदी शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है। राजपरिवारों में चांदी के बर्तनों का उपयोग आम था। हालांकि, चांदी महंगी होने के कारण आम लोगों के लिए सुलभ नहीं है। चांदी के बर्तन में दूध, पानी या अन्य पेय रखने से उनकी शुद्धता बढ़ती है।

7. मिट्टी के बर्तन की प्राकृतिकता

मिट्टी के बर्तन सबसे प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल विकल्प हैं। मिट्टी के बर्तन में रखा पानी स्वाभाविक रूप से ठंडा रहता है। मिट्टी के सूक्ष्म छिद्रों से पानी का वाष्पीकरण होता है, जो प्राकृतिक शीतलन प्रदान करता है। मिट्टी के बर्तन में पानी का pH क्षारीय (alkaline) हो जाता है, जो पाचन के लिए अच्छा है। मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक खनिज पानी में घुल जाते हैं। गर्मियों में मिट्टी के घड़े का पानी सबसे स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।

8. प्लास्टिक की बोतलों के खतरे

प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। प्लास्टिक में BPA (बिस्फेनॉल A) नामक रसायन होता है जो हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है। गर्म पानी या धूप में रखी प्लास्टिक की बोतलों से हानिकारक रसायन पानी में घुल जाते हैं। प्लास्टिक पर्यावरण के लिए भी बहुत हानिकारक है। प्लास्टिक को पूरी तरह विघटित होने में सैकड़ों साल लग जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्लास्टिक में माइक्रोप्लास्टिक के खतरों के बारे में चेतावनी जारी की है।

9. कांच के बर्तन की तटस्थता

कांच के बर्तन सबसे सुरक्षित और तटस्थ विकल्पों में से एक हैं। कांच किसी भी प्रकार का रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता। कांच के बर्तन में पानी का स्वाद बदलता नहीं है। ये साफ करने में आसान और पुन: उपयोग योग्य हैं। कांच पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि इसे पूरी तरह रीसायकल किया जा सकता है। हालांकि, कांच नाजुक होता है और टूट सकता है। कांच के बर्तन यात्रा के लिए असुविधाजनक हो सकते हैं।

10. बर्तन चुनने के व्यावहारिक सुझाव

सही बर्तन चुनते समय कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। घर पर तांबे या मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें। बाहर जाते समय स्टील या कांच की बोतल रखें। प्लास्टिक से पूरी तरह बचने की कोशिश करें। तांबे के बर्तन को हर 2-3 दिन में नींबू और नमक से साफ करें। मिट्टी के बर्तन को रोजाना धोएं और धूप में सुखाएं। पानी की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है – फ़िल्टर्ड या शुद्ध पानी का उपयोग करें। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बर्तन चुनें – एनीमिया में लोहा, पाचन समस्या में तांबा।

संदर्भ: भारतीय पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (CCRAS) और आयुर्वेद विशेषज्ञों की सिफारिशें।


निष्कर्ष

तांबे के बर्तन में पानी पीने से न केवल गुस्सा कम होता है, बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। हमारे पूर्वजों ने विभिन्न धातुओं के औषधीय गुणों को समझकर उनका उपयोग किया। आधुनिक विज्ञान भी इन पारंपरिक प्रथाओं को मान्यता दे रहा है। प्लास्टिक से बचकर और प्राकृतिक या धातु के बर्तनों का उपयोग करके हम अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की रक्षा कर सकते हैं। तांबे के पानी को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और मानसिक शांति का अनुभव करें।

Leave a Comment