जानवरों की दुनिया रहस्यों से भरी हुई है। हर जानवर की दृष्टि क्षमता अलग होती है। कुछ जानवर रात में देख सकते हैं, कुछ बहुत दूर तक देख सकते हैं, तो कुछ रंगों को बिल्कुल नहीं देख पाते। क्या आप जानते हैं कि कौन से जानवर रंग नहीं देख सकते और क्यों? आइए जानते हैं जानवरों की दृष्टि से जुड़े वैज्ञानिक और रोचक तथ्यों के बारे में।
1. मनुष्यों में रंग दृष्टि कैसे काम करती है
मनुष्यों की आंखों में दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं – रॉड्स और कोन्स। कोन कोशिकाएं रंगों को पहचानने में मदद करती हैं। मनुष्यों में तीन प्रकार की कोन कोशिकाएं होती हैं जो लाल, हरा और नीला रंग पहचानती हैं। इन तीनों के संयोजन से हम लाखों रंग देख पाते हैं। यह प्रक्रिया ट्राइक्रोमैटिक विजन कहलाती है। लेकिन सभी जानवरों में यह क्षमता नहीं होती।
2. गाय और रंग दृष्टि
गाय डाइक्रोमैटिक होती हैं, यानी उनमें केवल दो प्रकार की कोन कोशिकाएं होती हैं। गाय नीले और पीले रंग को देख सकती हैं, लेकिन लाल और हरे रंग को नहीं पहचान पातीं। यह एक आम भ्रांति है कि लाल रंग देखकर गाय या बैल गुस्सा हो जाते हैं। वास्तव में, बुलफाइटिंग में बैल कपड़े की हरकत से उत्तेजित होता है, न कि लाल रंग से। गाय का दूध उत्पादन और व्यवहार रंगों से प्रभावित नहीं होता।
3. कुत्ते और उनकी दृष्टि क्षमता
कुत्ते भी डाइक्रोमैटिक होते हैं और मुख्य रूप से नीले और पीले रंग देख सकते हैं। वे लाल और हरे रंग को अलग नहीं कर पाते और इन्हें भूरे या पीले रंग के शेड्स के रूप में देखते हैं। हालांकि, कुत्तों की रात में देखने की क्षमता मनुष्यों से बेहतर होती है क्योंकि उनकी आंखों में अधिक रॉड कोशिकाएं होती हैं। कुत्तों में गति को पहचानने की क्षमता भी अत्यधिक विकसित होती है। उनकी परिधीय दृष्टि (peripheral vision) मनुष्यों से 250 डिग्री तक होती है।
4. गधा और दृश्य संवेदनशीलता
गधा भी डाइक्रोमैटिक होता है और सीमित रंग देख सकता है। गधों में नीले और पीले रंग की पहचान होती है, लेकिन लाल-हरे स्पेक्ट्रम में उन्हें कठिनाई होती है। गधों की आंखें उनके सिर के किनारों पर होती हैं, जो उन्हें लगभग 360 डिग्री का देखने का क्षेत्र देती है। यह उनकी सुरक्षा के लिए विकसित हुआ है ताकि वे शिकारियों को जल्दी देख सकें। गधे दूरी का अंदाजा लगाने में भी माहिर होते हैं।
5. सुअर की दृष्टि और व्यवहार
सुअर भी डाइक्रोमैटिक होते हैं और सीमित रंग पहचान सकते हैं। उन्हें नीला और हरा रंग दिखाई देता है, लेकिन लाल रंग नहीं। सुअरों की नजर कमजोर होती है – वे लगभग 30-50 फीट तक साफ देख पाते हैं। हालांकि, इसकी भरपाई उनकी तीव्र सूंघने की शक्ति से हो जाती है, जो कुत्तों से भी बेहतर होती है। सुअर अपनी सूंघने की क्षमता से भोजन खोजते हैं, न कि दृष्टि से।
6. रंगों को न देख पाने के विकासवादी कारण
स्तनधारी जानवरों में रंग दृष्टि की कमी विकास की एक प्रक्रिया है। प्राचीन स्तनधारी निशाचर (रात में सक्रिय) थे, इसलिए उन्हें रंग देखने की नहीं बल्कि कम रोशनी में देखने की जरूरत थी। इसलिए उनमें रॉड कोशिकाएं अधिक विकसित हुईं। जानवरों के लिए गति पहचानना, दूरी का अंदाजा लगाना और कम रोशनी में देखना अधिक महत्वपूर्ण था। शिकारी जानवरों को शिकार पकड़ने के लिए और शाकाहारी जानवरों को बचने के लिए ये क्षमताएं जरूरी थीं।
7. कौन सा जानवर रंग देखने में अंधा होता है – सही उत्तर
सही उत्तर है: कुत्ता। कुत्ते पूरी तरह से रंगांध (color blind) नहीं होते, लेकिन वे मनुष्यों की तरह पूरे रंग स्पेक्ट्रम को नहीं देख सकते। कुत्ते मुख्य रूप से नीले और पीले रंग देख सकते हैं, जबकि लाल और हरे रंग उन्हें भूरे या पीले-भूरे शेड्स में दिखाई देते हैं।
संदर्भ: अमेरिकन केनेल क्लब (AKC) और वेटरनरी ऑप्थाल्मोलॉजी के शोध के अनुसार, कुत्तों में डाइक्रोमैटिक दृष्टि होती है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के नेत्र विशेषज्ञ Dr. Jay Neitz ने अपने अध्ययन में कुत्तों की रंग दृष्टि को विस्तार से समझाया है।
वैज्ञानिक व्याख्या:
- कुत्तों में केवल दो प्रकार की कोन कोशिकाएं होती हैं
- वे 555 nm (पीला-हरा) और 429 nm (नीला) तरंगदैर्घ्य देख सकते हैं
- लाल रंग (700 nm) उन्हें गहरे पीले या भूरे रंग में दिखता है
- हरा रंग भी उन्हें पीले या सफेद शेड में दिखता है
हालांकि, दिए गए सभी विकल्पों (गाय, कुत्ता, गधा, सुअर) में से कोई भी पूरी तरह रंगांध नहीं है। लेकिन रंग दृष्टि की सीमितता के मामले में कुत्ता सबसे अधिक प्रभावित होता है, विशेष रूप से लाल-हरे रंग स्पेक्ट्रम में।
8. जानवरों की विशेष दृष्टि क्षमताएं
कुछ जानवरों में मनुष्यों से बेहतर दृष्टि क्षमताएं होती हैं। बाज और चील मनुष्यों से 4-8 गुना बेहतर दूरी तक देख सकते हैं। मधुमक्खियां पराबैंगनी (UV) प्रकाश देख सकती हैं, जो मनुष्य नहीं देख सकते। सांप अवरक्त (infrared) विकिरण को महसूस कर सकते हैं, जिससे वे अंधेरे में भी शिकार पकड़ सकते हैं। गिरगिट की प्रत्येक आंख स्वतंत्र रूप से 180 डिग्री घूम सकती है। मकड़ियों में 8 आंखें होती हैं जो लगभग 360 डिग्री का क्षेत्र कवर करती हैं।
9. रंगांधता और मानव स्वास्थ्य
मनुष्यों में भी रंगांधता पाई जाती है, जो आमतौर पर आनुवंशिक होती है। लगभग 8% पुरुष और 0.5% महिलाएं किसी न किसी प्रकार की रंगांधता से प्रभावित होती हैं। सबसे आम प्रकार लाल-हरा रंगांधता है। इशिहारा टेस्ट से रंगांधता की जांच की जाती है। आधुनिक समय में विशेष चश्मों से कुछ प्रकार की रंगांधता में सुधार संभव है। हालांकि, रंगांधता के साथ भी सामान्य जीवन जीया जा सकता है।
10. पालतू जानवरों की दृष्टि का ध्यान
पालतू जानवरों के मालिकों को उनकी दृष्टि सीमाओं को समझना चाहिए। कुत्तों के लिए खिलौने खरीदते समय नीले और पीले रंग को प्राथमिकता दें क्योंकि वे इन्हें बेहतर देख सकते हैं। लाल खिलौने घास में खो सकते हैं क्योंकि कुत्ता उन्हें हरे रंग से अलग नहीं कर पाता। पालतू जानवरों की आंखों की नियमित जांच करवाएं। मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और अन्य नेत्र रोग जानवरों में भी होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ जानवरों की दृष्टि कमजोर हो सकती है।
संदर्भ: वेटरनरी मेडिकल एसोसिएशन के दिशानिर्देश और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह।
निष्कर्ष
जानवरों की दृष्टि मनुष्यों से भिन्न होती है और उनकी जीवनशैली के अनुकूल विकसित हुई है। कुत्ता, गाय, गधा और सुअर जैसे स्तनधारी सीमित रंग देख सकते हैं, लेकिन उनकी अन्य संवेदनाएं जैसे सूंघना और सुनना बहुत तीव्र होती हैं। रंग दृष्टि की कमी उनके जीवन को प्रभावित नहीं करती क्योंकि प्रकृति ने उन्हें अन्य तरीकों से सक्षम बनाया है। हमें अपने पालतू जानवरों की दृष्टि सीमाओं को समझकर उनकी बेहतर देखभाल करनी चाहिए।