IAS Interview Question Answer: आईएएस इंटरव्यू में अक्सर ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जो हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक रीति रिवाजों से जुड़े होते हैं। ये सवाल उम्मीदवार की सांस्कृतिक समझ, तार्किक सोच और संवेदनशीलता को परखते हैं। भारत एक विविधतापूर्ण देश है जहां हर धर्म और समुदाय की अपनी परंपराएं हैं। मृत्यु के बाद की रस्में और उनसे जुड़े रीति रिवाज हमारी सभ्यता का अभिन्न हिस्सा हैं। हर परंपरा के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक, सामाजिक या धार्मिक कारण होता है। आज का सवाल भी ऐसा ही है जो लगभग सभी धर्मों और समुदायों में प्रचलित एक परंपरा के बारे में है। यह प्रश्न न केवल परंपरा बल्कि मानवीय संवेदना, सामाजिक बंधन और व्यावहारिक कारणों को भी समझने का अवसर देता है। इस लेख में हम आपके लिए 10 महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान के सवाल लेकर आए हैं जो संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवहार से संबंधित हैं। तो चलिए शुरू करते हैं यह ज्ञानवर्धक यात्रा।
प्रश्न 1. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव को कितने घंटे में अंतिम संस्कार करना जरूरी है?
Answer: हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव को 24 घंटे के अंदर अंतिम संस्कार करना जरूरी माना जाता है। यह धार्मिक परंपरा और स्वास्थ्य दोनों से जुड़ा नियम है। भारत की गर्म जलवायु में शव जल्दी सड़ने लगता है इसलिए जितनी जल्दी हो सके अंतिम संस्कार कर देना चाहिए।
प्रश्न 2. अंतिम संस्कार में 13 दिन का शोक क्यों मनाया जाता है?
Answer: हिंदू परंपरा में 13 दिन का शोक इसलिए मनाया जाता है क्योंकि माना जाता है कि आत्मा को नया शरीर मिलने में 13 दिन लगते हैं। यह धार्मिक मान्यता और सामाजिक परंपरा से जुड़ा प्रश्न है। इन 13 दिनों में परिवार के सदस्य शोक में रहते हैं और तेरहवीं के दिन विशेष पूजा और भोज का आयोजन किया जाता है।
प्रश्न 3. मुस्लिम धर्म में मृत्यु के बाद शव को कैसे रखा जाता है?
Answer: मुस्लिम धर्म में मृत्यु के बाद शव को कफन में लपेटकर जल्द से जल्द दफना दिया जाता है। यह इस्लामिक परंपरा से संबंधित जानकारी है। इस्लाम में शव को जलाया नहीं बल्कि दफनाया जाता है और मुमकिन हो तो सूर्यास्त से पहले दफना देना चाहिए।
प्रश्न 4. पारसी समुदाय में मृतकों का अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है?
Answer: पारसी समुदाय में मृतकों को टॉवर ऑफ साइलेंस यानी दखमा में रखा जाता है जहां गिद्ध उन्हें खा जाते हैं। यह पारसी धार्मिक परंपरा से जुड़ी अनोखी प्रथा है। पारसी मानते हैं कि पृथ्वी, अग्नि और जल पवित्र हैं इसलिए उन्हें शव से अपवित्र नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 5. अंतिम संस्कार में फूलों का क्या महत्व है?
Answer: अंतिम संस्कार में फूल श्रद्धांजलि और सम्मान के प्रतीक हैं। यह सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा से संबंधित प्रश्न है। फूल सुगंध देते हैं और वातावरण को शांत बनाते हैं। साथ ही ये जीवन की नश्वरता को भी दर्शाते हैं कि जैसे फूल मुरझा जाते हैं वैसे ही मनुष्य का जीवन भी समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 6. श्मशान घाट या कब्रिस्तान बस्ती से दूर क्यों होते हैं?
Answer: श्मशान घाट या कब्रिस्तान स्वास्थ्य और सामाजिक कारणों से बस्ती से दूर होते हैं। यह शहरी नियोजन से जुड़ी जानकारी है। अंतिम संस्कार के दौरान धुआं और गंध फैलती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। साथ ही यह स्थान शांत वातावरण की मांग करता है।
प्रश्न 7. अर्थी को कंधे पर उठाने की परंपरा क्यों है?
Answer: अर्थी को कंधे पर उठाना मृतक के प्रति अंतिम सेवा और सम्मान का प्रतीक है। यह सामाजिक परंपरा से संबंधित प्रश्न है। यह परंपरा सभी धर्मों में किसी न किसी रूप में मौजूद है और यह दर्शाती है कि परिवार और समाज मृतक को अंतिम विदाई देने में साथ है।
प्रश्न 8. रात में लाश को अकेला क्यों नहीं छोड़ते हैं?
Answer: रात में लाश को अकेला नहीं छोड़ने के पीछे धार्मिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक कई कारण हैं। यह भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।
पहला कारण है धार्मिक मान्यता: हिंदू धर्म में माना जाता है कि मृत्यु के बाद आत्मा शरीर छोड़ देती है लेकिन वह आसपास ही भटकती रहती है। अगर शव को अकेला छोड़ दिया जाए तो बुरी आत्माएं या नकारात्मक ऊर्जा उस पर हावी हो सकती हैं। इसलिए परिवार के सदस्य या मित्र लगातार शव के पास बैठे रहते हैं और धार्मिक मंत्रों का जाप करते हैं।
दूसरा कारण है सामाजिक और मानवीय संवेदना: मृतक व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन परिवार और समाज के साथ बिताया है। उसकी अंतिम यात्रा में परिवार और मित्र साथ रहकर अपना प्यार और सम्मान प्रकट करते हैं। अकेला छोड़ना असम्मानजनक माना जाता है। यह परंपरा दर्शाती है कि मृत्यु के बाद भी हम अपने प्रियजन को अकेला नहीं छोड़ते।
तीसरा कारण है व्यावहारिक और सुरक्षा: रात के समय जानवर या कीड़े मकोड़े शव को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कोई व्यक्ति शव के पास रहकर इसकी रक्षा करता है। पुराने समय में जब बिजली नहीं थी तब यह और भी जरूरी था।
चौथा कारण है मनोवैज्ञानिक: जो लोग शोक में हैं उन्हें एक दूसरे का साथ और सहारा चाहिए। साथ बैठकर वे अपने दुख को बांटते हैं और एक दूसरे को संभालते हैं। अकेले में शोक और भी गहरा हो जाता है।
पांचवां कारण है धार्मिक अनुष्ठान: अंतिम संस्कार से पहले कई धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चार किए जाते हैं। दीप जलाए जाते हैं, अगरबत्ती और धूप जलाई जाती है, पवित्र जल छिड़का जाता है। इन सभी कार्यों के लिए लगातार किसी का शव के पास रहना जरूरी है।
यह परंपरा लगभग सभी धर्मों और समुदायों में किसी न किसी रूप में मौजूद है जो हमारी सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों को दर्शाती है।
प्रश्न 9. अंतिम संस्कार में धूप अगरबत्ती क्यों जलाई जाती है?
Answer: अंतिम संस्कार में धूप अगरबत्ती शव की गंध को कम करने और पवित्र वातावरण बनाने के लिए जलाई जाती है। यह धार्मिक और व्यावहारिक दोनों कारणों से जुड़ी परंपरा है। धूप अगरबत्ती की सुगंध से वातावरण शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
प्रश्न 10. मृतक के नाम पर दान क्यों दिया जाता है?
Answer: मृतक के नाम पर दान इसलिए दिया जाता है ताकि उसकी आत्मा को शांति मिले और पुण्य प्राप्त हो। यह धार्मिक और सामाजिक परंपरा से संबंधित प्रश्न है। हिंदू धर्म में माना जाता है कि दान और पुण्य के काम से मृतक की आत्मा को मोक्ष मिलने में मदद मिलती है। साथ ही यह जरूरतमंदों की मदद का एक सकारात्मक तरीका भी है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है। यहां दी गई जानकारी भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और विभिन्न धर्मों की मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न धर्मों, समुदायों और क्षेत्रों में अंतिम संस्कार की परंपराएं अलग अलग हो सकती हैं। यह लेख किसी धर्म या परंपरा का समर्थन या विरोध नहीं करता बल्कि केवल सांस्कृतिक समझ बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है। हर व्यक्ति को अपने धर्म और परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार करने का पूरा अधिकार है। सभी परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। यह लेख संवेदनशील विषय पर है इसलिए इसे शैक्षिक दृष्टिकोण से ही देखें। सामान्य ज्ञान के प्रश्नों के उत्तर सामान्य जानकारी पर आधारित हैं।